+ सरस्वती की कृपा से समस्त वस्तुओं की प्राप्ति -
परात्म-तत्त्व-प्रतिपत्ति-पूर्वकं,
परं पदं यत्र सति प्रसिद्ध्यति ।
कियत्ततस्ते स्फुरत: प्रभावतो,
नृपत्वसौभाग्यवरांगनादिकम् ॥22॥
मात! आपके ही प्रसाद से, तत्त्वज्ञानपूर्वक शिव प्राप्त ।
तव प्रसाद से राज्यलक्ष्मी आदि, सब मिलें इसमें क्या बात ?
हे सरस्वती! आपकी कृपा से परमात्मतत्त्व के ज्ञानपूर्वक परमपद (मोक्षपद)
अन्वयार्थ : की सिद्धि हो जाती है, तब आपके दैदीप्यमान प्रभाव के सामने राजापना, सौभाग्य तथा उत्तम स्त्री आदि की प्राप्ति क्या चीज है?