
मलैर्विुक्तो विमलो न कैर्जिनो, यथार्थनामा भुवने नमस्कृत: ।
तदस्य नामस्मृतिरप्यसंशयं, करोति वैल्यमघात्मनामपि ॥13॥
जग में कौन करे न विमल जिन, सार्थक संज्ञा को वन्दन ।
चूंकि पापियों को भी निर्मल, करता उनका नाम-स्मरण॥
अन्वयार्थ : हे प्रभो! इस संसार में ऐसा कौन होगा, जिसने समस्त मलों से रहित तथा अत्यन्त सार्थक नाम को धारण करनेवाले श्री विमलनाथ भगवान को नमस्कार न किया हो? अत: आपके नाम का स्मरण मात्र ही सभी पापी मनुष्यों को भी अत्यन्त विमल बना देता है ।