+ जिनेन्द्र भगवान का सुप्रभात (केवलज्ञान) अपूर्व महिमा का धारी -
मार्गं यत्प्रकटी-करोति हरते - दोषाऽनुषंग-स्थितिं;
लोकानां विदधाति दृष्टिमचिरा,-दर्थावलोक-क्षमाम् ।
कामासक्तधियामपि कृशयति, प्रीतिं प्रियायामिति;
प्रातस्तुल्यतयापि कोऽपि महिमा,-ऽपूर्व: प्रभातोऽर्हताम् ॥6॥
मार्ग प्रगट करता अरु दोष-संग की स्थिति नष्ट करे ।
लोक-दृष्टि को वस्तु-तत्त्व-दर्शन में शीघ्र समर्थ करे॥
कामासक्त पुरुष भी नारी, के प्रति प्रीति करें सु विनष्ट ।
प्रात:काल से भी अपूर्व महिमामय है अर्हन्त-प्रभात॥
अन्वयार्थ : श्री अर्हन्त भगवान का सुप्रभात (केवलज्ञान), मार्ग (मोक्षमार्ग) को प्रगट करता है, समस्त दोषों के संग से (साथ) होनेवाली स्थिति को नष्ट करता है, लोगों की दृष्टि को शीघ्र ही पदार्थों को देखने में समर्थ बनाता है तथा जिन मनुष्यों की बुद्धि, काम में आसक्त है अर्थात् जो पुरुष कामी हैं, उनकी स्त्री-विषयक प्रीति को नष्ट करता है; इसलिए यद्यपि अर्हन्तदेव का सुप्रभात भी प्रात:काल के समान मालूम पड़ता है तो भी यह प्रात:काल से भी अधिक वचन-अगोचर अपूर्व महिमा का धारी है ।