+ मङ्गलाचरण में श्री जिनेन्द्रदेव से मोक्ष-प्राप्ति हेतु प्रार्थना -
(आर्या)
त्रिभुवन-गुरो जिनेश्वर! परमानन्दैक-कारण! कुरुष्व ।
मयि किंकरेऽत्र करुणां, यथा तथा जायते मुक्ति: ॥1॥
हे त्रिभुवन गुरु! परमानन्द के, एकमात्र कारण जिनराज ।
मुझ किंकर पर ऐसी करुणा, कीजे मिले मुक्ति साम्राज्य॥
अन्वयार्थ : हे तीन लोक के गुरु! हे कर्मों के जीतनेवाले महात्माओं के स्वामी! हे उत्कृष्ट मोक्षरूप आनन्द को देनेवाले जिनेन्द्र! मुझ दास पर ऐसी दया कीजिए, जिससे कि मुझे मोक्ष प्राप्त हो जाए अर्थात् समस्त पाप कर्मों से मैं सर्वथा छूट जाऊँ ।