+ उपसंहार में आचार्य द्वारा दया की प्रार्थना -
जगदेकशरण! भगवन्नसम-श्रीपद्मनन्दित-गुणौघ !
किं बहुना कुरु करुणा-,मत्र जने शरणमापन्ने ॥8॥
तुम सम गुण हैं नहीं अन्य में, जिन्हें पद्मनन्दि गाते ।
बहुत कहूँ क्या कृपा करो प्रभु! चरण-शरण में जो आते॥
अन्वयार्थ : हे समस्त जगत् के एक शरणभूत जिनेन्द्र भगवान्! आपके अतिरिक्त अन्य किसी में नहीं पाए जातेह्न ऐसे श्री पद्मनन्दि आचार्य द्वारा गुनगान किये गये गुणसमूह को धारण करनेवाले हे जिनेश! अब, मैं विशेष कहाँ तक कहूँ? बस यही प्रार्थना है कि आपकी शरण में आये हुए जन अर्थात् मुझ पर इस संसार में अवश्य दया करें ।