+ क्रियाकाण्डरूपी वृक्ष में चूलिकारूपी पल्लव अभीष्ट फलदायी -
(अनुष्टुभ्)
पल्लवोऽयं क्रियाकाण्ड-कल्प-शाखाऽग्र-संगत: ।
जीयादशेष-भव्यानां प्रार्थिताऽर्थ-फल-प्रद: ॥15॥
क्रियाकाण्डमय कल्पतरु-शाखा में पल्लव यह अधिकार ।
जयवन्तो जो भव्यजनों को, दे अभीष्ट फल मंगलकार॥
अन्वयार्थ : समस्त भव्यजीवों को अभिलषित फल देनेवाले इस क्रियाकाण्डरूपी कल्पवृक्ष की शाखा में लगा हुआ 'क्रियाकाण्ड चूलिका' अधिकार नामक पल्लव, भव्य जीवों को अभीष्ट फलदेने वाला है; इसलिए यह पल्लव, इस लोक में सदा जयवन्त रहो ।