+ साक्षात् सुख, मोक्षाभिलाषी द्वारा ही सिद्ध -
मोक्ष एव सुखं साक्षात्, तच्च साध्यं मुमुक्षुभि: ।
संसारेऽत्र तु तन्नास्ति, यदस्ति खलु तन्न तत् ॥5॥
साक्षात् सुख है मोक्ष में, शिव-कामियों को साध्य है ।
संसार में सुख है नहीं, जो है उसे वे दु:ख कहें॥
अन्वयार्थ : साक्षात् सुख, मोक्ष में ही है और उस सुख को मोक्षाभिलाषी ही सिद्ध कर सकते हैं । संसार में साक्षात् सुख नहीं है और जो है, वह निश्चय से सुख नहीं, दु:ख ही है ।