
इत्येकाग्रना नित्यं, भावयन् भावना-पदम् ।
मोक्षलक्ष्मी-कटाक्षालि,-मालापद्मश्च जायते ॥10॥
एकाग्र मन से भावना जो, नित्य शिवपद की करें ।
वे मुक्ति-लक्ष्मी के नयन-, अलिपुञ्ज हेतु पद्म हैं॥
अन्वयार्थ : जो मुनि, एकाग्रचित्त होकर सदा आत्मस्वरूप की भावना करते हैं; वे मुनि, मोक्षरूपी लक्ष्मी के कटाक्षरूपी अलिमाला के लिए कमल के समान होते हैं ।