+ गुरु-वचन सर्वोत्तम मोक्ष-लक्ष्मी के प्रदाता -
(मालिनी)
भवतु भवतु यादृक् तादृगेतद्वर्पे;
हृदि गुरु-वचनं चेदस्ति तत्तत्त्व-दर्शि ।
त्वरितमसमसारानन्द-कन्दायमाना;
भवति यदनुभावादक्षया मोक्षलक्ष्मी: ॥5॥
यदि मन में हो वस्तु-स्वरूप दिखानेवाले गुरु-वचन ।
तो कुछ भी नहिं चिन्ता चाहे, जैसा भी क्यों रहे न तन॥
क्योंकि शीघ्र गुरुवचनों के, अनुभव से सहज प्राप्त होती ।
अनुपम अविनाशी सर्वोत्तम, आनन्द-दायक शिव-लक्ष्मी॥
अन्वयार्थ : यदि वस्तु के वास्तविक स्वरूप का दिखानेवाले गुरु वचन मेरे हृदय में विद्यमान हैं तो यह मेरा शरीर, जैसा रहे वैसा रहे, कोई चिन्ता नहीं क्योंकि हृदय में विद्यमान श्रीगुरु के वचन-अनुभव से शीघ्र ही सर्वोत्तम आनन्द को देनेवाली अविनाशी, मोक्षरूपी असाधारण लक्ष्मी की प्राप्ति होती है ।