
भूआउतेउवाऊ, णिच्चदुग्गदिणिगोदथूलिदरा।
पत्तेयपदिट्ठिदरा, तस पण पुण्णा अपुण्णदुगा॥73॥
अन्वयार्थ : पृथ्वी, जल, तेज, वायु, नित्यनिगोद, इतर निगोद। इन छह के बादर सूक्ष्म के भेद से बारह भेद होते हैं तथा प्रत्येक के दो भेद - एक प्रतिष्ठित दूसरा अप्रतिष्ठित और त्रस के पाँच भेद द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय, असंज्ञी पंचेन्द्रिय और संज्ञी पंचेन्द्रिय। इस तरह सब मिलाकर उन्नीस भेद होते हैं ॥73॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका