पज्जत्तमणुस्साणं, तिचउत्थो माणुसीण परिमाणं।
सामण्णा पुण्णूणा, मणुवअपज्जत्तगा होंति॥159॥
अन्वयार्थ : पर्याप्त मनुष्यों का जितना प्रमाण है उसमें तीन चौथाई मानुषियों का प्रमाण है। सामान्य मनुष्यराशि में से पर्याप्तकों का प्रमाण घटाने पर जो शेष रहे उतना ही अपर्याप्त मनुष्यों का प्रमाण है ॥159॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका