
वेगुव्विय उत्तत्थं, विजाण मिस्सं तु अपरिपुण्णं तं।
जो तेण संपजोगो, वेगुव्वियमिस्सजोगो सो॥234॥
अन्वयार्थ : वैगूर्विक का अर्थ वैक्रियक बताया जा चुका है। जब तक वह वैक्रियिक शरीर पूर्ण नहीं होता तब तक उसको वैक्रियिक मिश्र कहते हैं और उसके द्वारा होेनेवाले योग को-आत्मप्रदेश परिस्पन्दन को वैक्रियिक मिश्रकाययोग कहते हैं ॥234॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका