कम्मेव य कम्मभवं, कम्मइयं जो दु तेण संजोगो।
कम्मइयकायजोगो, इगिविगतिगसमयकालेसु॥241॥
अन्वयार्थ : ज्ञानावरणादिक अष्ट कर्मों के समूह को अथवा कार्मणशरीर नामकर्म के उदय से होेने वाली काय को कार्मणकाय कहते हैं और उसके द्वारा होने वाले योग-कर्माकर्षण शक्तियुक्त आत्मप्रदेशों के परिस्पन्दन को कार्मणकाययोग कहते हैं। यह योग एक दो अथवा तीन समय तक होता है ॥241॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका