सव्वसमासेणवहिदसगसगरासी पुणो वि संगुणिदे।
सगसगगुणगारेहिं य सगसगरासीण परिमाणं॥297॥
अन्वयार्थ : अपनी-अपनी गति में सम्भव जीवराशि में समस्त कषायों के उदयकाल के जोड़ का भाग देने से जो लब्ध आवे उसका अपने-अपने गुणाकार से गुणन करने पर अपनी-अपनी राशि का परिमाण निकलता है॥297॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका