
आवलियपुधत्तं पुण, हत्थं तह गाउयं मुहुत्तं तु।
जोयणभिण्णमुहुत्तं, दिवसंतो पण्णुवीसं तु॥405॥
अन्वयार्थ : चतुर्थ काण्डक में काल आवली पृथक्त्व और क्षेत्र हस्तप्रमाण है। पाँचवें काण्डक में क्षेत्र एक कोश और काल अन्तर्मुहूर्त है। छट्ठे काण्डक में क्षेत्र एक योजन और काल भिन्नमुहूर्त है। सातवें काण्डक में काल कुछ कम एक दिन और क्षेत्र पच्चीस योजन है ॥405॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका