
भरहम्मि अद्धमासं, साहियमासं च जम्बुदीवम्मि।
वासं च मणुवलोए, वासपुधत्तं च रुचगम्मि॥406॥
अन्वयार्थ : आठवें काण्डक में क्षेत्र भरतक्षेत्र प्रमाण और काल अर्धमास प्रमाण है। नौवें काण्डक में क्षेत्र जम्बूद्वीप प्रमाण और काल एक मास से कुछ अधिक है। दशवें काण्डक में क्षेत्र मनुष्यलोक प्रमाण और काल एक वर्ष प्रमाण है। ग्यारहवें काण्डक में क्षेत्र रुचक द्वीप और काल वर्षपृथक्त्व प्रमाण है ॥406॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका