पल्लसमऊण काले, भावेण असंखलोगमेत्ता हु।
दव्वस्स य पज्जाया, वरदेसोहिस्स विसया हु॥411॥
अन्वयार्थ : काल की अपेक्षा एक समय कम एक पल्य और भाव की अपेक्षा असंख्यात लोकप्रमाण द्रव्य की पर्याय उत्कृष्ट देशावधि का विषय है ॥411॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका