काले चउण्ण उड्ढी, कालो भजिदव्व खेत्तउड्ढी य।
उड्ढीए दव्वपज्जय, भजिदव्वा खेत्त-काला हु॥412॥
अन्वयार्थ : काल की वृद्धि होने पर चारों प्रकार की वृद्धि होती है। क्षेत्र की वृद्धि होने पर काल की वृद्धि होती है और नहीं भी होती है। इस ही तरह द्रव्य और भाव की अपेक्षा वृद्धि होने पर क्षेत्र और काल की वृद्धि होती भी है और नहीं भी होती है। परन्तु क्षेत्र और काल की वृद्धि होने पर द्रव्य और भाव की वृद्धि अवश्य होती है ॥412॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका