सक्कीसाणा पढमं, बिदियं तु सणक्कुमार माहिंदा।
तदियं तु बम्ह-लांतव, सुक्क-सहस्सारया तुरियं॥430॥
अन्वयार्थ : सौधर्म और ऐशान स्वर्ग के देव अवधि के द्वारा प्रथम भूमिपर्यन्त देखते हैं। सानत्कुमार और माहेन्द्र स्वर्ग के देव दूसरी पृथ्वी तक देखते हैं। ब्रह्म, ब्रह्मोत्तर, लांतव और कापिष्ठ स्वर्गवाले देव तीसरी भूमि तक देखते हैं। शुक्र, महाशुक्र, शतार और सहस्रार स्वर्ग के देव चौथी भूमि तक देखते हैं ॥430॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका