आणद-पाणदवासी, आरण तह अच्चुदा य पस्संति।
पंचमखिदिपेरंतं, छट्ठिं गेवेज्जगा देवा॥431॥
अन्वयार्थ : आनत, प्राणत, आरण और अच्युत स्वर्ग के देव पाँचवीं भूमि तक अवधि के द्वारा देखते हैं और ग्रैवेयकवासी देव छट्ठी भूमि तक देखते हैं ॥431॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका