
पंचरसपंचवण्णा, दो गंधा अट्ठफाससत्तसरा।
मणसहिदट्ठावीसा इंदियविसया मुणेदव्वा॥479॥
अन्वयार्थ : पाँच रस, पाँच वर्ण, दो गंध, आठ स्पर्श, सात स्वर और एक मन इस तरह ये इन्द्रियों के अट्ठाईस विषय हैं ॥479॥पमदादिचउण्हजुदी, सामयियदुगं कमेण सेसतियं।
जीवतत्त्वप्रदीपिका