पल्लासंखेज्जदिमं, विरदाविरदाण दव्वपरिमाणं।
पुव्वुत्तरासिहीणा, संसारी अविरदाण पमा॥481॥
अन्वयार्थ : पल्य के असंख्यातवें भागप्रमाण देशसंयम जीव हैं। इसप्रकार उक्त संयमियों और देशसंयमियों को मिलाकर छह राशियों को संसारी जीवराशि में से घटाने पर जो शेष रहे उतना असंयमियों का प्रमाण हैं ॥481॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका