
परमाणुआदियाइं, अन्तिमखंधं त्ति मुत्तिदव्वाइं।
तं ओहिदंसणं पुण, जं पस्सइ ताइं पच्चक्खं॥485॥
अन्वयार्थ : परमाणु से लेकर महास्कंध तक जो मूर्तिक द्रव्य उनको जो प्रत्यक्ष देखता है, वह अवधिदर्शन है। इस अवधिदर्शनपूर्वक ही अवधिज्ञान होता है ॥485॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका