
अवधिज्ञान के जितने भेद हैं उनके असंख्यातवें भागप्रमाण प्रत्येक तीन शुभलेश्यावाले जीव हैं। तथापि पीतलेश्यावालों के संख्यातवें भागमात्र पद्मलेश्यावाले हैं। पद्मलेश्यावालों के असंख्यातवें भागमात्र शुक्ललेश्यावाले हैं। ऐसे भावप्रमाण द्वारा तीन शुभलेश्यावाले जीवों का प्रमाण कहा ॥542॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका