
ववहारो य वियप्पो, भेदो तह पज्जओ त्ति एयट्ठो।
ववहार अवट्ठाणट्ठिदी हु ववहारकालो दु॥572॥
अन्वयार्थ : व्यवहार, विकल्प, भेद और पर्याय ये सब एकार्थवाची हैं। वहाँ व्यंजनपर्याय का अवस्थान अर्थात् वर्तमानपना उसके द्वारा स्थिति अर्थात् काल का प्रमाण, वही व्यवहार काल है ॥572॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका