
ववहारो पुण तिविहो, तीदो वट्टंतगो भविस्सो दु।
तीदो संखेज्जावलिहदसिद्धाणं पमाणं तु॥578॥
अन्वयार्थ : व्यवहार काल के तीन भेद हैं - भूत, वर्तमान, भविष्यत्। इनमें से सिद्धराशि का संख्यात आवली के प्रमाण से गुणा करने पर जो प्रमाण हो उतना ही अतीत अर्थात् भूत काल का प्रमाण है ॥578॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका