छद्दव्वावट्टाणं, सरिसं तियकालअत्थपज्जाये।
वेंजणपज्जाये वा, मिलिदे ताणं ठिदित्तादो॥581॥
अन्वयार्थ : अवस्थान=स्थिति छहों द्रव्यों की समान है। क्योंकि त्रिकालसंबंधी अर्थपर्याय वा व्यंजनपर्याय के मिलने से ही उनकी स्थिति होती हैं ॥581॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका