
संखेज्जासंखेज्जाणंता वा होंति पोग्गलपदेसा।
लोगागासेव ठिदी, एगपदेसो अणुस्स हवे॥586॥
अन्वयार्थ : दो अणुओं के स्कंध से लेकर पुद्गल स्कंध संख्यात, असंख्यात, अनंत परमाणुरूप हैं। तथापि वे सब लोकाकाश में ही रहते हैं। जैसे जल से सम्पूर्ण भरे हुये पात्र में क्रम से डाले हुये लवण, भस्म , सूई आदि एकक्षेत्रावगाहरूप रहते हैं, वैसे जानना। अविभागी परमाणु का क्षेत्र एक ही प्रदेशमात्र होता है ॥586॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका