जीवतत्त्वप्रदीपिका
दव्वं छक्कमकालं पंचत्थीकायसण्णिदं होदि।
काले पदेसपचयो, जम्हा णत्थि त्ति णिद्दिट्ठं॥620॥
अन्वयार्थ :
काल में प्रदेशप्रचय नहीं है, इसलिये काल को छोड़कर शेष द्रव्यों को ही पञ्चास्तिकाय कहते हैं ॥620॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका