जीवतत्त्वप्रदीपिका
णव य पदत्था जीवाजीवा ताणं च पुण्णपावदुगं।
आसवसंवरणिज्जरबंधा मोक्खो य होंति त्ति॥621॥
अन्वयार्थ :
जीव, अजीव, उनके पुण्य और पाप दो तथा आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा और मोक्ष ये नौ पदार्थ होते हैं ॥621॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका