
मिच्छा सावयसासणमिस्साविरदा दुवारणंता य।
पल्लासंखेज्जदिममसंखगुणं संखसंखगुणं ॥624॥
अन्वयार्थ : मिथ्यादृष्टि अनंतानन्त हैं। श्रावक देशविरत गुणस्थानवर्ती पल्य के असंख्यातवें भाग हैं। सासादन गुणस्थानवाले श्रावकों से असंख्यातगुणे हैं। मिश्र सासादनवालों से संख्यातगुणे हैं। अव्रतसम्यग्दृष्टि मिश्रजीवों से असंख्यातगुणे हैं ॥624॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका