जीवतत्त्वप्रदीपिका
दंसणमोहुदयादो, उप्पज्जइ जं पयत्थसद्दहणं।
चलमलिणमगाढं तं, वेदयसम्मत्तमिदि जाणे॥649॥
अन्वयार्थ :
दर्शनमोहनीय की सम्यक्त्व प्रकृति का उदय होने पर जो तत्त्वार्थ श्रद्धान चल, मलिन वा अगाढ़ होता है, उसे वेदकसम्यक्त्व जानो ॥649॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका