पल्लासंखेज्‍जदिमा, सासणमिच्छा य संखगुणिदा हु।
मिस्सा तेहिं विहीणो, संसारी वामपरिमाणं॥659॥
अन्वयार्थ : पल्य के असंख्यातवें भागप्रमाण सासादनमिथ्यादृष्टि जीव हैं और इनसे संख्यातगुणे मिश्र जीव हैं तथा संसारी जीवराशि में से क्षायिक, औपशमिक, क्षायोपशमिक, सासादन, मिश्र इन पाँच प्रकार के जीवों का प्रमाण घटाने से जो शेष रहे उतना ही मिथ्यादृष्टि जीवों का प्रमाण है ॥659॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका