जीवतत्त्वप्रदीपिका
मूलसरीरमछंडिय, उत्तरदेहस्स जीवपिंडस्स।
णिग्गमणं देहादो, होदि समुग्घादणामं तु॥668॥
अन्वयार्थ :
मूल शरीर को न छोड़कर तैजस-कार्मण रूप उत्तर देह के साथ जीवप्रदेशों के शरीर से बाहर निकलने को समुद्घात कहते हैं ॥668॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका