
आहारमारणंतिय, दुगं पि णियमेण एगदिसिगं तु।
दसदिसि गदा हु सेसा, पंच समुग्घादया होंति॥669॥
अन्वयार्थ : उक्त सात प्रकार के समुद्घातों में आहारक और मारणांतिक ये दो समुद्घात तो एक ही दिशा में गमन करते हैं, किन्तु बाकी के पाँच समुद्घात दशों दिशाओं में गमन करते हैं ॥669॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका