गुणजीवा पज्‍जत्ती, पाणा सण्णा य मग्गणुवजोगो।
जोग्गा परूविदव्वा, ओघादेसेसु पत्तेयं॥677॥
अन्वयार्थ : उक्त बीस प्ररूपणाओं में से गुणस्थान और मार्गणास्थान में यथायोग्य प्रत्येक गुणस्थान, जीवसमास, पर्याप्‍ति, प्राण, संज्ञा, मार्गणा और उपयोग का निरूपण करना चाहिये ॥677॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका