
थावरकायप्पहुदी, अविरदसम्मो त्ति असुहतियलेस्सा।
सण्णीदो अपमत्तो, जाव दु सुहतिण्णिलेस्साओ॥692॥
अन्वयार्थ : आदि की कृष्ण, नील, कापोत ये तीन अशुभ लेश्याएँ स्थावरकाय से लेकर चतुर्थ गुणस्थानपर्यन्त होती है और अंत की पीत, पद्म, शुक्ल ये तीन शुभ लेश्याएँ संज्ञी मिथ्यादृष्टि से लेकर अप्रमत्तपर्यन्त होती है ॥692॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका