दोण्हं पंच य छच्चेव दोसु मिस्सम्मि होंति वामिस्सा।
सत्तुवजोगा सत्तसु, दो चेव जिणे य सिद्धे य॥705॥
अन्वयार्थ : दो गुणस्थानों में पाँच, और दो में छह, मिश्र में मिश्ररूप छह, सात गुणस्थानों में सात, सयोगी, अयोगीजिन और सिद्धों के दो उपयोग होते हैं ॥705॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका