ओघे चोदसठाणे, सिद्धे वीसदिविहाणमालावा।
वेदकषायविभिण्णे अणियट्ठी पंचभागे य॥707॥
अन्वयार्थ : परमागम में प्रसिद्ध चौदह गुणस्थान और चौदह मार्गणास्थानों में उक्त बीस प्ररूपणाओं के सामान्य, पर्याप्‍त, अपर्याप्‍त ये तीन आलाप होते हैं। वेद और कषाय की अपेक्षा से अनिवृत्तिकरण के पाँच भागों में आलाप भिन्न-भिन्न समझने चाहिये ॥707॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका