णरलद्धिअपज्‍जत्ते, एक्को दु अपुण्णगो दु आलावो।
लेस्साभेदविभिण्णा, सत्त वियप्पा सुरट्ठाणा॥716॥
अन्वयार्थ : लब्ध्यपर्याप्‍तक मनुष्य में एक अपर्याप्‍त ही आलाप होता है। देवगति में लेश्याभेद की अपेक्षा से सात विकल्प होते हैं ॥716॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका