बादरसुहमेइंदियवितिचउरिंदियअसण्णिजीवाणं।
ओघे पुण्णे तिण्णि य, अपुण्णगे पुण अपुण्णो दु॥719॥
अन्वयार्थ : जो बादर एकेन्द्रिय, सूक्ष्म एकेन्द्रिय, द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय, और असंज्ञी पंचेन्द्रिय सामान्य जीव पर्याप्‍त नामकर्म के उदय से युक्त होते हैं, उनके तीन आलाप होते हैं। और जिनके अपर्याप्‍त नामकर्म का उदय है, उनके एक लब्ध्यपर्याप्‍त आलाप ही होता है ॥719॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका