
पुंवेदे थीसंढं वज्जित्ता सेसपच्चया होंति ।
इत्थीवेदे हारदु पुंसंढं च वज्जिदा सव्वे ॥४३॥
पुंवेदे स्त्रीषंढाभ्यां वर्जिता शेषप्रत्यया भवन्ति ।
स्त्रीवेदे आहारद्विकेन पुंषंढाभ्यां च वर्जिता सर्वे ॥
अन्वयार्थ : पुरुषवेद में स्त्रीवेद, नपुंसकवेद को छोड़कर सभी आस्रव होते हैं । स्त्रीवेद में आहारकद्विक, पुरुषवेद, नपुंसकवेद को छोड़कर ५३ आस्रव होते हैं ॥४३॥