मणपज्जे संढित्थीवज्जिदसगणोकसाय संजलणं ।
आदि मणवजोगजुदा पच्चयवीसं मुणेयव्वा ॥४८॥
मन:पर्यये षंढस्त्रीवर्जितसप्तनोकषाया: संज्वलना: ।
आदिमनवयोगयुक्ता: प्रत्ययिंवशति: ज्ञातव्या ॥
अन्वयार्थ : मन:पर्यय ज्ञान में हास्य, रति, अरति, शोक, भय, जुगुप्सा, पुरुषवेद, संज्वलन क्रोध,मान, माया, लोभ, चार मनोयोग, चार वचनयोग, औदारिक योग ये २० आस्रव होते हैं । स्त्रीवेद, नपुंसक वेद में मन:पर्ययज्ञान नहीं होता है ॥४८॥