
ज्ञानमती :
ज्ञान यदी निज ज्ञेय वस्तु से, सत्स्वरूप से भिन्न कहा;; तब तो ज्ञान-ज्ञेय दोनों का, भी अस्तित्व समाप्त हुआ;; प्रभो! ज्ञान के अभाव होने से बाह्याभ्यंतर सब ज्ञेय;;केसे होंगे सिद्ध! कहो फिर, तव मत विद्वेषी के मेय
यदि सत्रूप से भी ज्ञान ज्ञेय से भिन्न माना जाये, तब तो ज्ञान और ज्ञेय दोनों ही असत्रूप हो जायेंगे, क्योंकि हे भगवन्! आपके द्वेषी सर्वथैकांतवादियों के यहाँ ज्ञान के अभाव में बहिस्तत्त्वरूप तथा अन्तस्तत्त्वरूप ज्ञेय पदार्थों की सिद्धि भी केसे हो सकेगी ?
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