+ असत् का निषेध होता है क्या ? -
द्रव्याद्यन्तरभावेन, निषेध: संज्ञिन: सत:
असद्भेदो न भावस्तु, स्थानं विधि-निषेधयो: ॥47॥
अन्वयार्थ : [संज्ञिन: सत: द्रव्याद्यंतर भावेन निषेध:]जो संज्ञी और सत् है उसी का परद्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव से निषेध किया जाता है [असद्भेदो भावस्तु विधिनिषेधयो: स्थानं न] क्योंकि असत् रूप पदार्थ विधि और निषेध का स्थान नहीं हो सकता है।

  ज्ञानमती 

ज्ञानमती :


संज्ञी स्वद्रव्यादि चतुष्टय, से सत्रूप प्रसिद्ध रहे;;उसका परद्रव्यादि चतुष्टय, से ही सदा निषेध कहें;;असत्रूप का निषेध केसे, हो सकता है कहो सही;;चूँकि सर्वथा असत् पदारथ, विधि-निषेध का विषय नहीं
सतरूप संज्ञी पदार्थ का ही द्रव्यांतर आदि की अपेक्षा से निषेध किया जाता है। क्योंकि असत् रूप वस्तु विधि -निषेध का स्थान ही नहीं हो सकती है।