
ज्ञानमती :
संज्ञी स्वद्रव्यादि चतुष्टय, से सत्रूप प्रसिद्ध रहे;;उसका परद्रव्यादि चतुष्टय, से ही सदा निषेध कहें;;असत्रूप का निषेध केसे, हो सकता है कहो सही;;चूँकि सर्वथा असत् पदारथ, विधि-निषेध का विषय नहीं
सतरूप संज्ञी पदार्थ का ही द्रव्यांतर आदि की अपेक्षा से निषेध किया जाता है। क्योंकि असत् रूप वस्तु विधि -निषेध का स्थान ही नहीं हो सकती है।
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