
ज्ञानमती :
यदि सब धर्म अवाच्य रहेंगे, पुन: कथन उनका कैसे?;;धर्मदेशना, स्वपर पक्ष, साधन दूषण वाणी कैसे?;;यदी वचन संवृतीरूप, फिर मिथ्या ही वे सिद्ध हुए।;;इन परमार्थ विरुद्ध वचन से, नहिं सत्यार्थ बोध होवे
यदि सभी धर्म अवक्तव्य ही हैं पुन: आपके यहाँ उनका कथन भी कैसे हो सकेगा ? और यदि आप कहें कि उनका कथन संवृति रूप है तब तो परमार्थ से विपरीत होने से यह संवृति तो असत्य ही है।
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