
ज्ञानमती :
कहो बौद्ध जी! तत्त्व आपका, ‘अवक्तव्य’ किस विध से है?;;क्या अशक्ति से या अभाव से या अबोध से नहिं कहते;;इन तीनों में आदि-अंत के, कारण शक्य नहीं दिखते;;अत: बहाना करने से क्या, साफ कहो कि अभाव है
आप बौद्धों के यहाँ तत्व अवाच्य क्यों है ? क्या अशक्य होने से अवाच्य है या उसका अभाव होने से अवाच्य है अथवा उसका ज्ञान न होने से अवाच्य है ? इनमें से आदि और अन्त रूप दो पक्ष तो बन नहीं सकते। इसलिए बहानेबाजी से क्या ? स्पष्ट कहिए कि तत्त्व का अभाव है।
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