
ज्ञानमती :
यदि कार्य स्कंध भ्रांत हैं, तब कारण परमाणू भ्रांत;;चूँकि कार्य हेतू से होता, कारण परमाणू का ज्ञान;;यदि दोनों ये भ्रांत हुए तब, दोनों का हो गया अभाव;;उनमें रहने वाले गुण जात्यादिक का फिर नहिं सद्भाव
कार्यभूत चतुष्क को भ्रांत मानने से परमाणुओं को भी भ्रांत मानना पड़ेगा। क्योंकि कार्य के हेतु से ही कारण का ज्ञान होता है एवं इन दोनों के अभाव से इनमें स्थित रहने वाले गुण, जाति और क्रिया आदि कुछ भी सिद्ध नहीं हो सकेंगे।
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