
ज्ञानमती :
कार्य और कारण में यदि, एकत्व कहो तब एक रहे;;चूँकी दोनों अविनाभावी, अत: शेष भी नहीं रहे;;द्वित्व कथन भी विरुद्ध होता, यदि संवृत्ति से मानोगे;;संवृत्ति तो यह मृषा कहाती, अत: सभी मिथ्या होंगे
आप सांख्य आदि सर्वथा कार्य-कारण में एकत्व स्वीकार करेंगे तब तो दोनों में से किसी एक का अभाव हो जायेगा। पुन: एक किसी का अभाव होने पर शेष दूसरे बचे हुए का भी अभाव हो जायेगा; क्योंकि उन दोनों में अविनाभाव नियम है तथा च ‘यह कार्य है और यह कारण है’ इस तरह की दो की संख्या में भी विरोध हो जायेगा। यदि आप कहें कि संवृत्ति से ये सब कार्य-कारण, द्वित्व संख्यादि हैं तब तो वह आपकी संवृत्ति तो सर्वथा असत्य ही है।
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