
ज्ञानमती :
यदी कार्य कारण में भेदा-भेद उभय का ऐक्य कहो;;स्याद्वादमत द्वेषी के यह, कैसे होगा सत्य अहो;;यदी कार्य-कारण का भेदा-भेद अवाच्य कहे कोई;;तब ‘अवाच्य’ यह कथन असंगत, स्याद्वाद बिन घटे नहीं
स्याद्वाद नीति के शत्रुओं के यहाँ अन्यता और अनन्यतारूप उभयैकात्म्य संभव नहीं है, क्योंकि वे दोनों परस्पर विरोधी हैं। यदि कोई कहे कि हम तत्त्व को अन्यत्व, अनन्यत्व से रहित ‘‘अवाच्यरूप’’ मानते हैं, तब तो तत्त्व अवाच्य है। इस प्रकार से वाक्य द्वारा कथन भी नहीं कहा जा सकता है।
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